क्या आप जानते हैं ट्रेन कोच पर लगी पीली और सफेद रंग की धारियों का क्या मतलब होता है ?

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भारत में कहीं भी घूमना हो तो आपका सफर बिना भारतीय रेलवे के नहीं पूरा हो सकता है। भारतीय रेलवे के नाम कई रिकॉर्ड है। यह एशिया की सबसे बड़ी परिवहन संस्था है। यह दुनिया की एकमात्र ऐसी सरकारी संस्था है जो सबसे ज्यादा नौकरी प्रदान करती है। लगभग 150 साल हो गए भारतीय रेलवे को, यह तब भी प्रासंगिक थी और आज भी है। आज हम भारतीय रेलवे के बारे में जानेंगे और यह भी जानने की कोशिश करेंगे ट्रेन के डिब्बों में बने संकेतों और रंगों का क्या मतलब होता है।

भारतीय रेलवे की स्थापना

भारतीय उपमहाद्वीप पर पहली ट्रेन बंबई से ठाणे तक 21 मील तक चली थी। 1843 में भांडुप की यात्रा के दौरान, बॉम्बे को ठाणे, कल्याण और थाल और भोरे घाटों से जोड़ने के लिए एक रेलवे का विचार पहली बार बॉम्बे सरकार के मुख्य अभियंता जॉर्ज क्लार्क के दिमाग में आया था।

भारतीय रेलवे का औपचारिक उद्घाटन समारोह 16 अप्रैल 1853 को किया गया था। उद्घाटन के समय लगभग 400 मेहमानों को लेकर 14 रेलवे के डिब्बे 3.30 बजे बोरी बंदर के लिए बहुत सारी भीड़ की जोरदार तालियों और 21 बंदूकों की सलामी के बीच रवाना हुई थी। जिस दिन उद्घाटन हुआ हटा उस दिन सार्वजानिक छुट्टी की घोषणा कर दी गयी थी। भारतीय रेल, देश का प्रमुख परिवहन संगठन एशिया में सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और एक प्रबंधन के तहत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है।

Indian railway picture

भारतीय रेलवे में माल, यात्री, पर्यटक, उपनगरीय रेल प्रणाली, टॉय ट्रेन और लक्जरी ट्रेनें शामिल हैं। इस समय भारतीय रेलवे के अंतर्गत 4,337 ऑपरेटिंग रेलवे स्टेशन हैं। भारतीय रेलवे 16 जोन में बटा हुआ है। भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ यात्रियों को ढोती है। इसके अंतर्गत करीब 14 लाख लोग काम करते हैं। भारतीय रेलवे संगठन के अंतर्गत लगभग 11,000 ट्रेन रोज चलती है।

आइये अब जानते हैं कि भारतीय रेलवे के तहत ट्रेन में बने संकेतों का क्या मतलब होता है-

ट्रेन से यात्रा करते समय सभी ट्रेन के डिब्बों पर पीले और सफ़ेद आदि रंगों के पट्टियों को देखते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इन रंगीन पट्टियों को ट्रेन के कुछ डिब्बों पर क्यों लगाया जाता है, इसका क्या मतलब है? आइए जानते हैं कि रंगीन धारियों के बारे में, रंग के डिब्बों और उनके महत्व के बारे में।

ट्रेन के डिब्बों पर पीली और सफेद लाइन या धारियाँ क्या बताती हैं?

meaning of lines on the train

भारतीय रेलवे में बहुत सी चीजों को समझने के लिए एक विशेष प्रकार के प्रतीकों का उपयोग किया जाता है। इन सभी प्रकार के प्रतीकों की आवश्यकता लोगों को ट्रेन और स्टेशन के बारें में जानकारी प्रदान करने के लिए होती है। ट्रेन के नियम और कानून, इन सभी को ध्यान में रखते हुए, ट्रेन के डिब्बों में एक विशेष प्रकार के प्रतीकों का उपयोग किया जाता है।

नीले आईसीएफ कोच पर कोच के अंत में पीले या सफेद रंग की रेखाएं खिड़की के ऊपर होती हैं, जो वास्तव में कोच को दूसरे कोच से अलग करने के लिए उपयोग की जाती हैं। ये लाइनें दूसरी श्रेणी के अनारक्षित कोच को दर्शाती हैं। जब कोई ट्रेन स्टेशन पर आती है, तो कई लोग होते हैं जो जनरल बोगी के बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन इन पीली पट्टियों को देखकर लोग आसानी से समझ सकते हैं कि यह जनरल कोच है।

इसी तरह, नीले / लाल पर पीले रंग की धारियों का उपयोग विकलांग और बीमार लोगों के लिए किया जाता है। इसी तरह, ग्रे रंग पर हरी धारियों से संकेत मिलता है कि कोच केवल महिलाओं के लिए है। ये रंग पैटर्न केवल मुंबई, पश्चिम रेलवे में नए ऑटो डोर क्लोजिंग ईएमयू के लिए शामिल किए गए हैं।

इसी तरह लाल रंग की पट्टी फर्स्ट क्लास के कोच को दर्शाती है। तो अब हम समझ गए हैं कि इन रंगीन पट्टियों को ट्रेन के डिब्बों में क्यों लगाया जाता है और वे क्या संकेत देते हैं

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