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सुशांत को याद कर कृति सेनन ने लिखा इमोशनल पोस्ट, कहा ‘सुश… मैं जानती थी कि तुम्हारा..

सुशांत सिंह राजपूत का दुनिया से अचानक यूँ चले जाना वाकई हर किसी के लिए हैरान कर देने वाला है। इसके पीछे की असल वजह क्या है ये अभी तक कोई नहीं जानता हालांकि पुलिस केस की जांच कर रही है। बता दें कि एक समय बॉलीवुड के गलियारों में इस बात के खूब चर्चे थे कि अभिनेता सुशांत और कृति सेनन एक दूसरे के साथ रिलेशनशिप में हैं।

दोनों साथ में एक फिल्म भी कर चुके है उन्होंने “राबता” में एकसाथ काम किया था जो कि साल 2017 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के बाद कई ऐसी ख़बरें आई थी जिसमें कहा गया था कि ये दोनों का अफेयर चल रहा है। हालांकि न तो सुशांत ने और न ही कृति ने कभी अपने रिलेशनशिप के बारे में पुष्टि की। अब सुशांत के चले जाने के बाद कृति सेनन ने अपने इंस्टाग्राम पर सुशांत सिंह राजपूत के लिए काफी इमोशनल पोस्ट लिखा है।

कृति सेनन ने सुशांत सिंह राजपूत के लिए लिखा इमोशनल पोस्ट


कृति सेनन ने लिखा कि, ‘सुश… मैं जानती थी कि तुम्हारा शानदार दिमाग तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त और सबसे बड़ा दुश्मन था. लेकिन ये जानकर मैं पूरी तरह से टूट चुकी हूं कि तुम्हारी जिंदगी में एक ऐसा समय भी आया जब तुमने जीने से ज्यादा मरना आसान लगा. काश तुम्हारे आसपास लोग होते, जिनकी मौजूदगी तुम्हें उन पलों से बाहर निकल पाती. काश तुमने उन लोगों को ये झटका न दिया होता जो तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं. काश तुम्हारे अंदर जो टूटा हुआ था उसे मैं जोड़ पाती. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. मैं इतनी सारी चीजों की कामना करती हूं… मेरे दिल का एक हिस्सा तुम्हारे साथ चला गया है और मेरे दिल के दूसरे हिस्से में तुम हमेशा जिंदा रहोगे. मैंने तुम्हारी खुशियों के लिए दुआ मांगना कभी बंद नहीं किया था और ना ही कभी करूंगी.’

सुशांत सिंह राजपूत के साथ शेयर की अपनी तसवीरें :

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कृति सेनन ने सुशांत सिंह राजपूत की याद में इंस्टाग्राम पर कुछ तसवीरें भी पोस्ट की। कृति ने यह पोस्ट सुशांत के मरने के दो दिन बाद किया। दो दिनों तक कुछ ना बोलने के कारण कुछ लोगों ने उन्हें यह कहकर ट्रोल भी किया कि ‘आप बहुत निर्दयी हो, सुशांत के लिए एक पोस्ट भी नहीं डाला’, ‘तुम कितने पत्थर दिल हो जो सुशांत के लिए एक शब्द भी नहीं बोला’

Kriti-senan-Sushant-singh-rajput

शायद लोगों के ऐसे कमेंट्स पढ़कर ही कृति सेनन ने ये पोस्ट डाला हो.. हालांकि कृति सेनन की पोस्ट को पढ़कर लगता है कि वो गहरे सदमे में हैं। क्यूंकि उनके खास दोस्त सुशांत अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके पास सिर्फ सुशांत के साथ बिताये गए वक़्त की यादें ही बची है। सुशांत को लेकर बॉलीवुड के और भी कई बड़े बड़े सितारों ने पोस्ट लिखा इसके अलावा क्रिकेट जगत के खिलाडियों ने भी सुशांत के लिए दुःख व्यक्त किया है। बता दें कि सुशांत और कृति की फिल्म ‘राबता’ में दोनों केमिस्ट्री और अदाकारी बहुत अच्छी थी हालांकि फिल्म हिट नहीं हो पाई थी।

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सोनू सूद की मदद से मुंबई से बिहार पहुंची गर्भवती महिला ने अपने बच्चे का नाम रखा सोनू सूद

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कोरोना महामारी के बीच बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद गरीबों और प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए जी-जान से लगे हुए है। एक तरफ ऐसे एक्टर और एक्ट्रेस हैं जिनकी फिल्में करोड़ों कमाती है लेकिन वो इस मुश्किल समय में गरीबों की मदद करने की बजाय आराम से अपने घर में बैठे है और सोशल मीडिया पर सेल्फी अपलोड करके अपने आप को हीरो समझ रहे है।

वहीं दूसरी तरफ सोनू सूद जैसा नेकदिल इंसान है जो प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। हालांकि कुछ और भी बड़े एक्टर्स हैं जिन्होंने पीएम केयर्स फण्ड में अच्छी खासी रकम दान की है लेकिन इस समय तो चारों तरफ सोनू सूद की ही तारीफ हो रही है और होनी भी चाहिए क्यूंकि एक वही है जो खुद जमीनी स्तर पर उतर कर काम कर रहें है।

इस कठिन समय में प्रवासी मज़दूरों की मदद कर रहे हैं सोनू सूद

Sonu sood helps poor

अब तक सोनू सूद हजारों मजदूरों को उनके घर-गाँव पहुंचा चुके है। बहुत से मजदूरों ने घर पहुँचने के बाद सोनू सूद को धन्यवाद कहा है। यहाँ तक की एक महिला ने तो अपने नवजात बच्चे का नाम भी सोनू सूद ही रख दिया। इससे आप समझ सकते हैं की उन मजदूरों के दिल में सोनू सूद के किस कदर जगह बना ली है।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान एक गर्भवती महिला को मुंबई से दरभंगा (बिहार) जाना था लेकिन महिला के पास वहां पहुंचने का कोई साधन नहीं था ऐसी परिस्थिति में सोनू सूद ने उस महिला की मदद की।

Sonu sood with his family

सोनू सूद द्वारा की गई मदद से वो महिला मुंबई से दरभंगा बिना किसी दुविधा के आसानी से पहुंच गई। अब उस महिला ने अपने बच्चे का नाम ही सोनू सूद रख दिया है। यूजर ने ट्वीट कर कहा, ‘काम बोलता है, और उस काम की इज्जत होती है, बाद में उस इज्जत को नाम दिया जाता है.’

सोनू बोले- ‘यह मेरा सबसे बड़ा अवार्ड है’


जब यह ट्वीट सोनू सूद ने पढ़ा तो उन्होंने रिप्लाई देते हुए लिखा कि, ‘यह मेरा सबसे बड़ा अवार्ड है’ हमारा भी यही मानना है कि इस से बड़ा अवार्ड कुछ हो ही नहीं सकता। लोगों से सोनू सूद को इतना प्यार मिल रहा है की उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। आशा करते हैं कि बॉलीवुड के बाकि बड़े बड़े एक्टर भी सोनू से सीख लेंगे और मुश्किल समय में लोगों की मदद के लिए आगे आयेंगे।

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अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में खुदाई के दौरान वर्षों पुराना सच आया सामने, मिली यह चीजें

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। कई वर्षों तक विवाद में रहने के बाद पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा था कि यह मंदिर की जमीन है। कोर्ट के फैसले के बाद एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया था लेकिन कोरोनावायरस और लॉकडाउन के चलते यह निर्माण कार्य कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था।

Ayodhya Ram Mandir

अब एक बार फिर से मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया है जिसके तहत 67 एकड़ के श्रीराम जन्मभूमि परिसर में समतलीकरण और अतिक्रमण आदि को हटाने का काम किया जा रहा है। समतलीकरण और खुदाई के काम के दौरान मंदिर का सैकड़ों वर्षों का पुराना इतिहास भी सामने आ रहा है। दरअसल, समतलीकरण और खुदाई के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और मंदिर के पुरावशेष मिल रहे हैं।

समतलीकरण के दौरान मिली कई प्राचीन मूर्तियां व शिवलिंग :

Shree Ram Mandir

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चम्पत राय ने बताया कि मंदिर वाली भूमि के नीचे कई प्रकार की प्राचीन मूर्तियां, खंभे व शिवलिंग भी मिला है। वैसे इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है क्योंकि इसका अनुमान पहले से था कि मंदिर की भूमि के नीचे प्राचीन खंभे व मूर्तियां मिलने की संभावना है। दरअसल, जब मुगल आक्रांताओं ने मंदिर को तोड़ा था तब उसका मलबा व मूर्तियां नीचे ही दबी रह गई थी जो अब खुदाई के दौरान बाहर आ रही है।

Ram Mandir History

सैकड़ों वर्षों तक विवादित रही अयोध्या की श्रीराम जन्मभूमि पर कोर्ट के आदेश के बाद कार्य शुरू हुआ है जिसके समतलीकरण कार्य में 3 जेसीबी, 1 क्रेन, 2 ट्रैक्टर और 10 मजदूर लगाए गए हैं। इस दौरान कई हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियाँ, पुष्प, कलश, दोरजाम्ब जैसी कलाकृतियाँ, भवन के मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तम्भ, 8 रेड सैंड स्टोन के स्तंभ और 5 फिट आकार की नक्काशीयुक्त शिवलिंग की आकृति मिली है।

ट्रस्ट की देख-रेख में हो रहा है भव्य मंदिर का निर्माण :


कोरोना महामारी को देखते हुए समतलीकरण कार्य में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर का निर्माण होने की तैयारियां अब गति पकड़ रही हैं। इस मंदिर के निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया है। इसी ट्रस्ट की देख-रेख में भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। समतलीकरण का कार्य पूरा हो जाने के बाद भूमि पूजन का आयोजन किया जाएगा।

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क्रिकेट में पहली बार चिप वाले स्मार्ट बैट की हुई शुरूआत, जानें इसकी खासियत

क्रिकेट को ‘जेंटलमैन का खेल’ कहा जाता है और क्रिकेट बहुत ही स्टाइलिश खेल है। बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ क्रिकेट के नियमों और टेक्नोलॉजी में कई सारे विकास हुए। क्रिकेट को वैश्विक संस्था ICC संभालती है। क्रिकेट की बेहतरी के लिए यह संस्था हर साल नए नियम लेकर आती है। ऐसा ही एक नियम आता है बैट में चिप लगाने का। आइये इस बारें में विस्तार से जानते हैं।

क्रिकेट तो स्मार्ट है ही अब इसको खेलने के लिए इस्तेमाल होने वाले बैट को भी स्मार्ट बनाया जायेगा। दरअसल बैट के सिरे पर अब डिवाइस लगी होगी। यह डिवाइस बैट के घुमाने के स्पीड, एंगल और खेले गए शॉट की एफिशिएंसी की सूचनाएँ इकठ्ठा करेगी। इस डिवाइस को बैट के सिरे में लगाने के बाद इसे StanceBeam नाम के एक एप्प से जोड़ दिया जायेगा। जिससे सारी सूचनाएं फोन पर मिल जाया करेंगी।

पहले भी हो चुका है इस्तेमाल

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बैट में इस डिवाइस का उपयोग ICC चैंपियंस ट्राफी 2017 में किया जा चुका है। इसे ‘स्मार्ट बैट’ का नाम दिया गया था। आइये इसके बारें में विस्तृत रूप से जानते हैं।

ICC के CEO रह चुके डेव रिचर्डसन ने बताया है कि यह चिप बैट में लगाने के बाद बल्ले की स्पीड, कोण, बैक लिफ्ट और बैट की दिशा का पता लगाया जा सकेगा। इस चिप से बल्लेबाजों को बहुत मदद मिलेगी। बैटिंग करने के बाद बल्लेबाज़ पता कर सकेगा कि वह शॉट कैसे खेल रहा है। उसका बैट स्ट्रेट लाइन में जा रहा है कि अक्रॉस द लाइन में जा रहा है। इस डिवाइस से समीक्षा करके बल्लेबाज़ अपनी बल्लेबाजी को सुधार सकेंगे।

अन्य खेलों में भी होता है इस डिवाइस का उपयोग

chip in bat

डेव रिचर्डसन ने बताया कि इस तरह की तकनीक का उपयोग गोल्फ और बेसबोंल जैसे खेलों में होता आ रहा है। यह तकनीक काफी रोमांचकारी है। इस डिवाइस के उपयोग से हर क्रिकेट प्रशंसक पता कर सकेगा कि बल्लेबाज़ के बैट की स्पीड और कोण क्या है? यह डिवाइस एक एप्प से जुड़ा होगा जिससे सभी आमजन भी इससे जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

चिप बनाने वाली कंपनी

Cricket Bat making

इस चिप को बनाने वाली कंपनी ‘इंटेल’ है। इस साल अप्रैल में ICC ने इंटेल को अपना ‘इनोवेशन पार्टनर’ बनाया है। इंटेल द्वारा बनायी गयी चिप पर ICC का अधिकार है। कंपनी ने घोषणा की है कि यह चिप साल के अंत तक बाज़ार में बिकनी शुरू हो जाएगी। इसे हर क्रिकेट खेलने वाला खिलाड़ी खरीद कर अपने बैट में लगा सकेगा और अपनी बल्लेबाज़ी की समीक्षा करके अपनी स्किल में सुधार कर सकेगा।

किन खिलाडियों ने किया है अब तक इस चिप का उपयोग

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ICC ने चैंपियंस ट्राफी 2017 में सभी टीम के अधिकतम तीन खिलाड़ियों द्वारा इस चिप का इस्तेमाल करने का आदेश दिया था। भारत की तरफ से रोहित शर्मा, आन्जिक्य रहाणे और रविचंद्रन अश्विन ने इस चिप का उपयोग करने की उम्मीद थी। चिप लगे स्मार्ट बैट की कीमत बाज़ार में कीमत 2 हज़ार से लेकर 10 हज़ार तक है। इनको ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

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जब भी किसी दो पक्ष के बीच मुकाबला होता है तो उसका निर्णय और नियमों का अवलोकन करने के लिए एक व्यक्ति होता है जिसे जज कहा जाता है। कानूनी प्रक्रिया में निर्णय देने वाले को जज जबकि खेल में निर्णय देने वाले व्यक्ति को अंपायर कहा जाता है। लगभग हर खेल में एक अंपायर जरूर होता है।

अगर क्रिकेट की बात की जाए तो इसमें अंपायर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। कभी-कभी अंपायर के एक निर्णय की वजह से मैच का रिजल्ट बदल जाता है। क्रिकेट में बहुत सारे नियम होते है। ग्राउंड पर उन नियमों की निगरानी करके रिजल्ट देना अंपायर की जिम्मेदारी और कर्तव्य होता है। क्रिकेट में अंपायर ग्राउन्ड पर खड़ा होता है। इनका काम खिलाडियों से भी मुश्किल होता है।

क्या आपने सोचा है कि क्रिकेट में अंपायर कैसे बनते हैं, अंपायर बनने के लिए पात्रता क्या होती है, क्या अंपायर बनने के लिए क्रिकेट खेलना जरूरी है? इन सबके बारें में आइये विस्तार से जानते हैं।

क्रिकेट अंपायर (Cricket Umpire) बनने हेतु प्रक्रिया

Kohli with Umpire

आपको बता दें कि अंपायर बनने के लिए क्रिकेट खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है। अगर किसी ने क्रिकेट खेला है तो यह उसकी अतिरिक्त योग्यता मानी जायेगी।

1- देखने की क्षमता होनी चाहिए उत्तम

अंपायर बनने के लिए आपकी नज़र बहुत पैनी होनी चाहिए। कमज़ोर नज़र वाले अंपायर कभी नहीं बन सकते हैं। क्रिकेट मैदान पर हम सबने देखा होगा कि कभी भी कोई अंपायर नज़र के चश्मे पहनकर नहीं खड़ा होगा।

2- अच्छी फिटनेस

Umpire Jump

अंपायर अगर बनना है तो खिलाडियों की तरह अच्छी फिटनेस होनी चाहिए। ग्राउंड पर अक्सर देखा गया है कि कभी कभार गेंद अंपायर की तरफ आती है तो वह फुर्ती से बच जाते हैं। फिटनेस का महत्व अम्पायरिंग में भी होता है।

3- क्रिकेट नियमों की पूरी जानकारी

अगर जब तक किसी को क्रिकेट के बारें नहीं मालूम होगा वह अंपायर नहीं बन सकते है। अंपायर बनने के लिए क्रिकेट के नियमों की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। आपको बता दें कि जिस तरह से क्रिकेटरों के प्रदर्शन को आंककर उन्हें अलग अलग ग्रेड में रखा जाता है ठीक उसी तरह अम्पायरों के लिए भी ग्रेड कैटेगरी होती है।

BCCI ने चार ग्रेड में अंपायरों को विभाजित किया है। ग्रेड A में 20 अंपायर, ग्रेड B में 25, ग्रेड C में 35 और ग्रेड D में 40 अंपायर हैं। BCCI ग्रेड A अंपायरों को 40,000/दिन और अन्य को 30,000 रूपये/प्रतिदिन देता है।

क्रिकेट अंपायर बनने की प्रक्रिया

Cricket Umpire

1- अंपायर बनने के लिए सबसे पहले सम्बंधित राज्य के क्रिकेट संघ के साथ पंजीकरण करना होता है। इसके बाद आपके नाम को राज्य संघ BCCI को भेजता है।

2- एक बार जब कोई स्थानीय मैचों में भाग लेता है तो राज्य संघ उसके नाम को BCCI द्वारा हर साल या दो साल में एक बार आयोजित होने वाली लेवल 1 की परीक्षा के लिए भेजा जाता है।

3- BCCI सभी आवेदकों के लिए 3 दिन की कोचिंग क्लास की व्यवस्था करता है। फिर चौथे दिन परीक्षा आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जाता है। जब उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हो जाते हैं तो उन्हें एक इंडक्शन कोर्स करना होता है। जहाँ पर खेल के नियमों और उससे सम्बंधित एक मौखिक इंटरव्यू होता है।

4- शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों के लिए एक और परीक्षा भी आयोजित की जाती है। यह प्रैक्टिकल और मौखिक भी हो सकती है।

क्रिकेट अंपायर कैसे बने ?

Aleem-Dar 2011 world cup Umpire

5- जो उम्मीदवार लेवल 1 की परीक्षा को पास कर लेते हैं वह लेवल 2 की परीक्षा में भाग लेते हैं। लेवल 2 की परीक्षा 1 साल बाद आयोजित की जाती है।

6- लेवल 2 परीक्षा जोकि लिखित, प्रैक्टिकल और वायवा के रूप में होती है, इसे पास करने वालों का फिर मेडिकल टेस्ट किया जाता है।

7- जो उम्मीदवार लेवल 2 की परीक्षा और मेडिकल टेस्ट को पास कर लेते है उन्हें एक इंडक्शन प्रोग्राम से गुज़रना पड़ता है। इसके पूरा होते है उसे BCCI का अंपायर घोषित कर दिया जाता है। BCCI का अंपायर घोषित होने के बाद घरेलु मैचों में अंपायरिंग करनी होती है। इसके बाद ही उनके लिए इंटरनेशनल मैचों में मौका मिलता है।

अंपायर के रिटायर होने की उम्र

S Ravi umpire

फर्स्ट क्लास मैचों में अंपायरिंग करने वाले अंपायर की उम्र 55 वर्ष होती है। इसके अलावा वनडे में 58 और टेस्ट मैचों में अंपायरिंग करने वाले अंपायर को 60 वर्ष उम्र में रिटायर होना पड़ता है।

आपको बता दें कि ICC के अंपायरिंग पैनल में वनडे के लिए 93, टेस्ट क्रिकेट के लिए 62, T-20 के लिए 11 अंपायर शामिल हैं। भारत की तरफ से ICC अंपायर पैनल में एकमात्र अंपायर सुंदरम रवि हैं।

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क्या आप जानते हैं कैसे किया जाता है किन्नरों का अंतिम संस्कार ?

हम सब समाज में औरतों की स्थिति के बारें में बात करते हैं लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि औरतों के अलावा भी इंसान है जिसकी स्थिति समाज में उनसे भी ज्यादा ख़राब है। वह इंसान है किन्नर। पुरुषों और औरतों की दुनिया से किन्नरों की दुनिया बिल्कुल अलग होती है। आमतौर पर समाज में किन्नरों को तुच्छ माना जाता है। भले ही वह लोगों को ख़ुशी के मौके पर दुआ देते हैं लेकिन उनको इज़्ज़त शायद ही मिलती है।

समाज में किन्नरों को लेकर बहुत सारी अवधारणाएं है जिसे लेकर आम लोग अपरिचित है। किन्नरों में कई सारी प्रथाएं है जो बहुत ही अजीब है और चौकाने वाली हैं आइये आज इसी के बारें में जानते हैं।

1- रात में शवयात्रा निकालना

Kinnar in India

क्या आपको पता है किन्नरों की शवयात्रा रात में ही क्यों निकाली जाती है? इसके पीछे एक मान्यता है, कहा जाता है कि अगर किन्नर का शव किसी ने देख लिया तो उसका अगला जन्म किन्नर के रूप में होगा। किन्नरों की धर्म यात्रा अन्य धर्मों के दाह-संस्कार से अलग होती है। आम आदमी कोई किन्नर का शव ले जाते हुए न देखें इसलिए शवयात्रा रात में निकाली जाती है।

2- शव की जूतों-चप्पलों से पिटाई

Facts about Kinnar

यह सुनने में जरूर अजीब लगेगा लेकिन यह सच है कि किन्नर की लाश को किंन्नरों द्वारा जूतों और चप्पलों से पीटा जाता है। कहा जाता है इससे उसके उस जन्म के पापों का प्रायश्चित हो जाता है। एक मान्यता यह है कि अगर शव को जूतों-चप्पलों से पीटा जाए तो अगले जन्म में वे साधारण इंसान बनकर पैदा होंगे क्योंकि उनकी आत्मा को लगेगा यह शरीर उनके लिए एक पाप की तरह था। यही कारण है शव को जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है।

3- दाह-संस्कार की प्रक्रिया

जब भी कोई किन्नर मरता है तो उसके शव को दफनाया जाता है। आपको जानकार हैरानी होगी जब कोई किन्नर मरता है तो उसकी मौत का शोक नहीं मनाया जाता है। वैसे तो किन्नर हिन्दू धर्म को मानते हैं लेकिन शव को फिर भी दफनाया जाता है।

4- किन्नरों के भगवान

Iravan

जी हाँ, किन्नरों के भी भगवान होते हैं। उन्हें इरावन या अरावन के नाम से जाना जाता है। इरावन अर्जुन और नाग कन्या की संतान है। महाभारत में अरावन की कहानी उद्घृत है। किन्नर हर साल अपने भगवान से शादी करते हैं। हर कोई किन्नर दुल्हन बनता है और विवाह के अगले दिन वह इरावन देवता की मूर्ति को पूरे शहर में घुमाते है। इसके बाद उनकी मूर्ति को तोड़ देते है। इसके बाद किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर शोक मनाते हैं और विधवा की तरह रोते हैं।

तमिलनाडु के कूवगाम में हर साल भगवान इरावन की शादी को धूमधाम से मनाया जाता है

इरावन देवता के बारें में महाभारत में बताया गया है। युद्ध के दौरान पांडवों को माता काली की पूजा के लिए एक राजकुमार की बलि देनी थी। बलि के लिए कई राजकुमारों को पूछा गया लेकिन कोई तैयार न हुआ। फिर इरावन ने कहा की वह बलि चढ़ेंगे। लेकिन इरावन ने बलि चढ़ने से पहले एक शर्त रख दी कि वह तभी बलि चढ़ेंगे जब उनकी शादी हो जाएगी।

इसके बाद समस्या का समाधान भगवान श्रीकृष्ण ने किया। श्रीकृष्ण खुद मोहिनी का रूप धारण करके आये और इरावन से शादी कर ली। शादी के अगले दिन इरावन की बलि दे दी गयी। इसी प्रथा को किन्नर आज भी निभाते है।

5- किन्नरों का खानपान

Iravan Kinnar

कभी भी किन्नरों के घर का भोजन नहीं करना चाहिए। इसके बारें में गरुण पुराण में बताया गया है। किन्नरों को दान करना शुभ माना जाता है। इसलिए उन्हें अच्छा-बुरा सभी आदमी दान करते हैं इसलिए यह पता लगाना मुश्किल होता है जिस भोजन को ग्रहण किया जा रहा है वह किसके घर का है। यही कारण है कि किन्नरों के गहर पर खाना नहीं खाना चाहिए।

6- किन्नरों के जन्म पर मिथक

कहा जाता है कि पिछले जन्म के पापों की वजह से इंसान किन्नर के रूप में जन्म लेता है। ज्योतिष शास्त्र में कई ग्रह और योग बताए गए हैं जब किन्नरों का जन्म होता है। किन्नर के रूप में जन्म लेना श्राप से पाया हुआ जीवन कहा जाता है। उपरोक्त दोनों कारणों के बारें में पुख्ता सबूत यह है कि अर्जुन श्राप के कारण किन्नर बने थे और शिखंडी अपने पूर्व जन्म के कर्मों के कारण किन्नर बने थे।

इसके अलावा किन्नर के जन्मने में शनि की बहुत भूमिका होती है। किन्नरों की उत्पत्ति ब्रह्मा की परछाई से हुई थी। यह भी कहा जाता है कि अरिष्टा और कश्यप ऋषि से किन्नरों की उत्पत्ति हुई थी।

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