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रात के समय नहीं खानी चाहिए यह चीजें, सेहत पर पड़ता है बुरा प्रभाव

स्वास्थ्य के लिए खानपान का सही होना बहुत जरूरी है। कब खाना है? कितना खाना है? किस समय खाना है? यह सब अगर ध्यान में रखा जाए तो हमारी दिनचर्या तो ठीक रहेगी ही साथ ही हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा। ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग जल्दी भोजन ग्रहण कर लेते हैं और कुछ बहुत देर रात में खाना खाते हैं।

खानपान के समय और मात्रा का हमारी सेहत पर सीधा प्रभाव पड़ता है। रात के समय खाया हुआ खाना हमारी नींद पर प्रभाव डालता है। अगर रात का खाना ठीक नहीं है तो वह जरूर हमारी नींद पर प्रभाव डालेगा।

आर्युवेद के अनुसार सोने से दो घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए। अगर खाना खाने के तुरंत बाद सोया जाता है तो उससे मोटापा बढ़ता है और पाचन तंत्र भी ख़राब होता है। कई चीज़ें ऐसी हैं जो सोने से पहले नहीं खानी चाहिए क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव होता है। हम आपको आज कुछ ऐसी चीज़ों के बारें में बताएंगे जिसे सोने से पहले खाने से बचना चाहिए।

1- पास्ता

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पास्ता बहुत जल्दी तैयार हो जाता है। दिनभर थक के आये लोग सोने जाने से पहले इसे झट से बनाकर खा लेते हैं। इसमें कार्बोहाईड्रेट व कई अन्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिसे शरीर जल्दी से पचा नहीं पाता है। अगर देर रात में कोई पास्ता खता है तो उसे कब्ज और हाईपर एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

2- मसालेदार भोजन

ज्यादा मसालेदार भोजन करना सेहत के लिए हानिकारक होता है। अगर रात में सोने से पहले मसालेदार भोजन खाया जाता है तो शरीर में पित्त बढ़ता है। जो शरीर के लिए हानिकारक होता है। इसलिए रात के समय मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए।

3- मिठाई

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देर रात को मिठाई खाना भी सेहत के लिए खतरनाक साबित होता है। कभी भी सोने से पहले मिठाई नहीं खानी चाहिए इससे दांत ख़राब हो जाते हैं। मोटापा भी बढ़ता है जिसका शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए कहा जाता है कि रात के समय चॉकलेट नहीं खानी चाहिए।

4- नूडल्स

Noodles

नूडल्स में बहुत ज्यादा हाई-कैलोरी होती है। इसलिए सोने से पहले नूडल्स का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि नूडल्स बहुत जल्दी बनकर तैयार होता है इसलिए लोग इसे ज्यादा खाते हैं। आपको बता दें कि नूडल्स में बहुत ज्यादा कार्बोहाईड्रेट होता है। यह वसा में बदल जाता है। सोने से पहले नूडल्स कभी भी नहीं खाना चाहिए, नहीं तो इससे पेट से सम्बंधित बहुत सारी समस्याएं सामने आती है।

5- फाइबर वाली सब्जियां

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ऐसी सब्जियां जिनमें फाइबर होता है उन्हें खाने से पेट काफी देर तक भरा हुआ महसूस होता है। ऐसी सब्जियां हैं- ब्रोकोली, प्याज, पत्तागोभी आदि। इन्हे सोने से पहले नहीं खाना चाहिए क्योंकि फाइबर पाचन तंत्र की गति को धीमा कर देता है। जिससे पेट फूला हुआ लगता है।

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इस वजह से माँ बाप के कहने पर चुपचाप अरेंज मैरिज कर लेती है लड़कियां

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शादी जीवन का वह पल होता है जिसे हर कोई अपने मनमुताबिक और ख़ुशी से जीना चाहता है। हम सभी जानते हैं कि भारतीय समाज में लड़कियों की स्थिति कैसी है। बहुत ही कम परिवार ऐसे होंगे जहाँ पर लड़कियों की मर्जी से शादी की जाती होगी। भारत में शादी दो तरह से लोकप्रिय है। एक अरेंज मैरिज और दूसरा लव मैरिज। अरेंज मैरिज करने वाले लोगों की संख्या भारत में ज्यादा है।

ऐसा देखा गया है कि लड़कियां माँ-बाप के पसंद के लड़के से शादी करने को महत्व देती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लड़कियां अपने मन के लड़कों से शादी क्यों नहीं कर पाती है। क्या कारण है कि वह अपने परिवार की पसंद के खिलाफ बगावत नहीं कर पाती है? आज हम इन्ही सब कारणों के बारें में जानेंगे-

1- परिवार की इज्जत का ख्याल

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भारत में लड़कियों को देवी माना जाता है। जब एक घर में लड़की पैदा होती है तो उसे माँ-बाप की इज्जत करार दे दिया जाता है। लड़कियों को सख्त हिदायत दी जाती है कि वे कोई ऐसा काम न करें जिसकी वजह से परिवार का नाम बदनाम हो। घर की इज्जत बची रहे इसलिए लड़कियां माँ-बाप की पसंद के खिलाफ नहीं जा पाती हैं और न चाहते हुए भी अरेंज मैरिज करने को मजबूर होती हैं।

2- बॉयफ्रेंड का न बनना

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कई बार ऐसा देखा गया है कि किसी घर में लड़की के ऊपर ज्यादा बंदिश रहती है तो उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं बन पाता है या यूँ कहें कि उसे प्यार करने का मौका ही नहीं मिलता है। उसे घर की चारदीवारी में ऐसे कैद किया जाता है कि वह बाहर की दुनिया से अनजान रहती है। वह घर के कामों में ही उलझी रहती है। इस वजह से उसे प्यार क्या होता है इसका एहसास भी नहीं हो पाता है। इसलिए ऐसी लड़कियां अरेंज मैरिज करने को मजबूर होती है।

3- पढ़ाकू लड़कियां

कुछ लड़कियां बहुत पढ़ाकू होती है। इस वजह से उनमे बहुत एट्टीट्यूड होता है जिससे उनके बॉयफ्रेंड भी नहीं बनते हैं। ऐसी लड़कियां पढ़ाई में ही मशगूल रहती है। वह प्यार के पचड़े में नहीं पड़ती हैं। इन्हे अरेंज मैरिज करने से कोई भी दिक्कत नहीं होती है।

4- लड़का सरकारी या बिजनेस वाला

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कुछ लड़कियां शादी के बाद ऐसे घर में रहना चाहती हैं जहाँ पर सब सुख-सुविधा हो, धन धान्य की कोई कमी न हो, पति अच्छा कमाता हो। अक्सर देखा गया है माँ-बाप लड़की के लिए सरकारी नौकरी वाला लड़का ढूंढ़ते हैं। लड़की भी सोचती है जब लड़का सरकारी नौकरी वाला रहेगा तो उसका भविष्य सुरक्षित रहेगा। इसलिए लड़कियां ऐसे लड़कों से अरेंज मैरिज करने में संकोच नहीं करती हैं।

5- प्यार में धोखा

कुछ लड़कियां प्यार में धोखा खाने के बाद अरेंज मैरिज करती हैं। जो लड़की एक बार प्यार में धोखा खा लेती है वह फिर से प्यार के पचड़े में नहीं पड़ना चाहती है। अक्सर देखा गया है कि ऐसी लड़कियां अपने प्रेमी को सबक सिखाने के लिए भी अरेंज मैरिज कर लेती हैं।

6- परिवार का संस्कार

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संस्कारी लड़कियां कभी भी परिवार के खिलाफ नहीं जाती है। वह अपनी जिंदगी से समझौता कर लेंगी लेकिन परिवार एक मूल्यों और संस्कारों से कभी समझौता नहीं करेंगी। परिवार के लोग उनके लिए चाहे जैसा लड़का ढूंढ़ देंगे वह उसे ही अपना लेंगी। परिवार की इज्जत न ख़राब हो इसलिए संस्कारी लड़कियां अरेंज मैरिज कर लेती हैं।

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धोनी बाकी खिलाड़ियों की तरह अपने हेलमेट पर तिरंगे झंडे का स्टीकर क्यों नहीं लगाते ?

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भारतीय तिरंगे को हर भारतीय ऊँचा करना चाहेगा। लोग अपने प्रोफेशन में तिरंगे को सम्मान देते हैं। फिर चाहे वह राजनेता हो, फिल्म बिरादरी हो या खिलाड़ी हो। सभी तिरंगे की शान को ऊँचा रखने की कोशिश करते हैं। खेल में ज्यादातर मौकों पर खिलाड़ी तिरंगे के नीचे ही खेलते हैं। किसी भी खेल में उनका प्रतिनिधित्व उनके ध्वज से जाना जाता है।

जब भी खिलाड़ी जीत हासिल करके पोडियम पर खड़ा होता है तो उस समय राष्ट्रीय ध्वज की शान में राष्ट्रगान बजता है और ध्वज फहराया जाता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है। ज्यादातर मौकों पर देखा जाता है कि खेल में तिरंगा बहुत फहराया जाता है। बात जब क्रिकेट की आती है तो स्टेडियम में तिरंगा ही तिरंगा नज़र आता है।

दर्शक ही नहीं भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी भी तिरंगे को अपनी जर्सी पर लगाकर खेलते हैं। तिरंगा हर भारतीय क्रिकेटर की जर्सी पर रहता है। वहीं आपने देखा होगा कि जब बल्लेबाज़ बल्लेबाज़ी करने के लिए आते हैं तो उनके हेलमेट पर भी तिरंगा लगा होता है।

धोनी के हेलमेट पर नहीं लगा होता है तिरंगा

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सचिन तेंदुलकर से लेकर विराट कोहली तक सभी के हेलमेट पर तिरंगा लगा हुआ हम सभी ने देखा है लेकिन क्या आप जानते हैं भारत के पूर्व कप्तान रहे धोनी के हेलमेट पर तिरंगा क्यों नहीं लगा होता है? आपको बता दें कि हेलमेट के आगे की ओर नीचे BCCI का लोगो और ऊपर तिरंगा लगा होता है। क्या आपने कभी गौर किया है कि जब धोनी बल्लेबाज़ी के लिए आते हैं तो कई बार वे बिना तिरंगे झंडे वाला हेलमेट पहनकर बल्लेबाजी करते हैं इसके अलावा जब कीपिंग करते हैं तो भी उनके हेलमेट पर तिरंगा नहीं लगा होता है।

बैटिंग के दौरान तो फिर भी एकाध बार उनके हेलमेट पर तिरंगा दिख जाता है लेकिन कीपिंग करते हुए धोनी हमेशा बिना स्टीकर वाला हेलमेट ही पहनते हैं। आखिर इसके पीछे क्या कारण है कि धोनी तिरंगा लगा हुआ हेलमेट नहीं पहनते हैं। आज हम इसके बारें में जानेंगे।

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धोनी कितने सच्चे देशप्रेमी है इसके बारें में बताने की जरूरत नहीं है। खेल का मैदान हो या सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना, धोनी ने हर जगह भारत और देश को प्राथमिकता दी है। धोनी के हेलमेट पर तिरंगे का स्टीकर नहीं लगा होता है। हेलमेट पर तिरंगा न लगाने का मतलब यह नहीं है कि धोनी तिरंगे का सम्मान नहीं करते हैं। बल्कि इसके पीछे एक कारण है।

तिरंगे का स्टीकर नहीं होने के पीछे है यह कारण

MS Dhoni helicopter shot

जब धोनी विकेटकीपिंग करते हैं तो अक्सर हेलमेट लगाकर या टोपी लगाकर कीपिंग करते हैं। लेकिन जब स्पिनर गेंदबाज़ी करता है तो वह हेलमेट उतारकर पीछे ग्राउंड पर रख देते हैं और टोपी पहन लेते हैं। मैच के दौरान आपने देखा भी होगा कि धोनी टोपी को अपनी कमर में पैजामा के नीचे दबा कर रखते हैं लेकिन जब तेज गेंदबाज बोलिंग करने आता है तो फिर से हेलमेट की जरुरत पड़ती है।

वे टोपी को तो पैजामे में दबा लेते हैं लेकिन हेलमेट को जमीन पर ही रखना पड़ता है। यही कारण है धोनी हेलमेट पर तिरंगा नहीं लगाते हैं। क्योंकि जब उसे नीचे रखेंगे तो तिरंगे का अपमान होगा। नियम के अनुसार जिन चीजों पर राष्ट्रीय झंडा लगा होता है उनको नीचे जमीन पर रखने से राष्ट्रीय झंडे का अपमान होता है।

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धोनी अपने राष्ट्रीय धवज की बहुत इज्ज़त करते हैं इसलिए उनको इस नियम का पता है। धोनी अपने हेलमेट पर तिरंगे का स्टीकर न लगवाकर असल में तिरंगे के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। इसलिए वह हेलमेट में तिरंगा नहीं लगाते है।

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भानगढ़ : भारत का एकमात्र किला जहां सूर्यास्त के बाद नहीं रूक सकते आप, जानिए इस किले का रहस्य

भारत में कई सारी जगहें है जो मोस्ट हॉन्टेड है। इन हॉन्टेड जगहों को देखने और जानने के लिए लोग अक्सर उत्सुक रहतें हैं। अगर अभी गूगल पर सर्च किया जाए कि ‘भारत में हॉन्टेड जगहें कौन सी है’ तो इस लिस्ट में ‘भानगढ़ का किला’ सबसे पहले आता है। इस किले में ऐसा क्या है कि सरकार द्वारा यहां पर रात को न ठहरने के आदेश दिए गए हैं आइये इस किले के रहस्य और इसके इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं। Bhangarh Fort Story in Hindi

भानगढ़ का किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यह पर कानूनी रूप से सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद जाना मना है। यह किला 17 वीं शताब्दी में बनाया गया था। इसे भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधोसिंह प्रथम के लिए बनवाया था। किले और इसके इलाके आज भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं।

अंधेरा होते ही सबको कर दिया जाता है बाहर :

Bhangarh Fort

अंधेरा होने के बाद किले में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। भानगढ़ के स्थानीय लोग कई कहानियां सुनाते हैं सरकार ने कई साइन बोर्ड लगाते हुए कहा है कि रात में किले में प्रवेश करना निषेध है। वैसे किले के भूतिया होने की कई कहानियां मौजूद है। स्थानीय लोग और इतिहासकार इस बारें में अलग राय और तथ्य बताते हैं।

किवदंती है कि गुरु बालू नाथ द्वारा भानगढ़ किले पर एक श्राप है। यह स्थान उनके लिए समाधि स्थल था लेकिन अचानक राजा मान सिंह ने गुरु बालू नाथ की समाधि स्थल पर एक किले का निर्माण करने का निर्णय लिया। राजा ने गुरु बाला नाथ को मना लिया कि किले की परछाई उनके समाधि को नहीं छुएगी और अगर ऐसा होता है, तो पूरा गांव बर्बाद हो जाएगा। जब किले का निर्माण हुआ तो छाया ने उसे छू लिया और गाँव नष्ट हो गया।

इस किले को जुड़ी है कई कहानियां :

Bhangarh Fort Story

एक कहानी बाबा बालकनाथ को लेकर भी मशहूर है। कहा जाता है यह किला बाबा बालकनाथ के श्राप से ग्रसित है। भगवंत दास ने बाबा बालकनाथ को मना करके इस किले का निर्माण कराया। लेकिन बालकनाथ ने किले के निर्माण के वक़्त एक शर्त रख दी थी कि किले का निर्माण हो लेकिन इसकी परछाई मेरी झोपड़ी पर पड़ी तो उसी वक़्त तुम्हारा राजपाट ख़त्म हो जायेगा। भगवंत दास उनकी इस बात पर मान गए। किला बनवाया गया लेकिन उसकी छाया बालकनाथ के झोपड़ी पर नहीं पड़ी।

जब भगवंत दास की मृत्यु हो गयी तो उनके बेटे अजब सिंह ने इस किले का निर्माण फिर से कराया और इसको इतना ऊँचा बनाया कि इसकी परछाई बालकनाथ के झोपड़ी पर पड़ने लगी। इसके बाद बालकनाथ का श्राप इस किले पर लग गया और यह किला बर्बाद होकर भूतिया बन गया।

इस किले में कई लोग हो चुके हैं लापता :

Bhangarh most haunted forts in India

यह किला यूँ ही भूतिया नहीं माना जाता है इसका साक्ष्य भी कई बार मिल चुका है। एक बार कुछ छात्र अपने दोस्तों के साथ इस किले में घुसे लेकिन दुबारा वापस लौट के नहीं आये। स्थानीय लोग दृढ़ता से विश्वास करते हैं कि इस किले में भूतों का अस्तित्व हैं। उन लोगों का मानना है कि इस किले में बने मंदिर गांववालों की रक्षा करते हैं। भानगढ़ आते ही हनुमान, मंगला देवी, कृष्ण केशव, सोमेश्वर मंदिर सहित कई मंदिर देखने को मिल जाते हैं।

इन मंदिरों को देखकर आश्चर्य होगा क्योंकि किले के अंदर किसी भी मंदिर पर छत नहीं है लेकिन मंदिर फिर भी आजतक सुरक्षित हैं। जब भी लोग छत का निर्माण करते हैं, तो यह बिना किसी कारण के खुद गिर जाता है। यही कारण है कि लोगों ने मंदिर पर छत बनाना छोड़ दिया है।

एक तांत्रिक के श्राप से वीरान हो गया भानगढ़ :

Bhangarh Fort Mystery

इस किले के भूतिया होने की एक और कहानी है। यह कहानी एक तांत्रिक और राजकुमारी रत्नावती की है। तांत्रिक को सुंदर राजकुमारी से प्यार हो गया और वह उसे पकड़ना चाहता था। उसने एक बार तेल पर काला जादू किया, यह तेल राजकुमारी के बालों के लिए था। रत्नावती को इस बारे में पता चला और उसने पत्थर पर तेल फेंक दिया और बाद में उस पत्थर ने तांत्रिक को मार डाला।

मरते-मरते तांत्रिक ने उस नगरी व राजकुमारी को नाश होने का श्राप दे दि‍या और संयोग से उसके एक महीने बाद ही भानगढ़ की अपने पड़ोसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई हो गई और उस लड़ाई में राजकुमारी सहित भानगढ़ के सभी निवासी मारे गए और पूरा भानगढ़ वीरान हो गया। यहीं से यह किला भूतिया बन गया। कहते हैं कि आज भी इस किले में राजकुमारी रत्नावती की चीख गूंजती है।

यहां आने वाले हर पर्यटक का स्वागत किया जाता है, लेकिन भानगढ़ किले का दौरा करने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। अधिकांश लोगों के लापता होने की सूचना यहाँ मिली है और उनमें से अधिकांश विदेशी हैं। इसलिए यहाँ विदेशियों के प्रवेश करने की अनुमति जल्दी नहीं मिलती है।

इस लेख में आपने भानगढ़ किले का इतिहास व भानगढ़ किले की कहानी तथा इससे जुड़ी रहस्यमय बातें पढ़ी। आपको यह जानकारी कैसे लगी हमें कमेंट करके जरुर बताएं।

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क्या आप जानते हैं वकील काले रंग का कोट ही क्यों पहनते हैं ? जानिए इसके पीछे की कहानी

ड्रेस कोड कॉन्फिडेंस, डिसिप्लिन और प्रोफेशन को व्यक्त करने का एक माध्यम होता है। आये दिन हम ऐसे तमाम प्रोफेशन देखते हैं जिसका अपना एक अलग ड्रेस कोड होता है। फिर चाहे यह पुलिस, सेना, डॉक्टरी और वकील का हो। जब सभी प्रोफेशन का अपना ड्रेस कोड होता है तो उनका रंग भी निर्धारित होता है।

ऐसे ही एक प्रोफेशन है वकील का। हमने अक्सर देखा है कि वकील का कोट हमेशा काले रंग का होता है। क्या आपको पता है कि यह कोट काले रंग का ही क्यों होता है। आज हम इसके बारें में जानेंगे।

कोर्ट के डेकोरम को बनाए रखने और अन्य लोगों से अलग दिखने के लिए भी वकील काले रंग का कोट पहनते हैं और गले में एक सफ़ेद सी पट्टी बांधते हैं। न्यायपालिका में एक ड्रेस कोड होता है जिसके अनुसार जज भी एक ख़ास तरह की पोशाक पहनकर सुनवाई करते है।

रंगों का मतलब

lawyer dress code

ब्लैक एंड व्हाइट रंग में वकीलों की पोशाक कुछ अपवादों को छोड़कर दुनिया भर में कानूनी पेशे का प्रतीक है। काले रंग का आम तौर पर अलग-अलग तरह के मतलब होते हैं। हर रंग की तरह इसमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों अर्थ छिपा होता हैं। एक ओर यह मृत्यु, बुराई और रहस्य का संकेत देता है, जबकि दूसरी ओर यह शक्ति और अधिकार का प्रतीक भी है।

काले रंग को दो कारणों से चुना गया था। सबसे पहले पुराने जमाने में अन्य रंग की डाई तब आसानी से उपलब्ध नहीं थी। हालाँकि, ‘ब्लैक कोट’ पहनने के पीछे मुख्य कारण यह है कि ब्लैक अथॉरिटी और पावर का रंग है। ब्लैक खुद को प्रस्तुत करने का प्रतिनिधित्व करता है।

सफेद रंग प्रकाश, अच्छाई, मासूमियत और पवित्रता को दर्शाता है। एक कानूनी प्रणाली के रूप में एक आम आदमी के लिए न्याय की एकमात्र उम्मीद यह दिखाता है। इसलिए न्याय का प्रतिनिधित्व करने के लिए सफेद रंग चुना जाता है। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों पक्ष एक समान ड्रेस कोड पहनते हैं। रंग का महत्व इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि कानून अंधा है।

काले रंग का अर्थ है अपारदर्शी और इसलिए अभियोजन और बचाव के पक्ष को तब तक अज्ञात माना जाता है जब तक कि उन्हें कानून द्वारा ड्रेस कोड से पुष्टि नहीं की जाती है, इसलिए ‘ब्लैक गाउन’ पहना जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

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आपको बता दें कि वकालत की शुरुआत साल 1327 में एडवर्ड III ने शुरू की। उस समय सिर्फ जज की वेशभूषा ही तय थी। साल 1694 में जब ब्रिटेन की महारानी क्वीन मैरी की चेचक से मृत्यु हुई तो उनके पति विलियम्स ने सभी जजों और वकीलों को आदेश दे दिया कि शोक के रूप में सभी काला गाउन पहनकर आएं। तब से लेकर अब तक इस आदेश को रद्द नहीं किया गया है। यही नियम फिर पूरी दुनिया में फ़ैल गया।

वकीलों के काले कोट को लेकर एक और कहानी मशहूर है

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काले और सफेद ड्रेस कोड की उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में हुई। काले और सफेद रंग को अचानक से नहीं चुना गया। दरअसल 1685 के फरवरी में राजा चार्ल्स द्वितीय की मृत्यु हो गई। लोगों ने उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए एक काले और सफेद गाउन पहनना शुरू किया। उस समय से वकीलों के लिए यह वर्दी डिज़ाइन की गई है।

यदि हम हॉलीवुड की फिल्मों और पुरानी फोटो को देखे तो पाएंगे कि उस समय जज सर पर एक विग पहनते थे। भारत में अधिनियम 1961 के तहत कोर्ट में सफ़ेद बैंड टाई के साथ काला कोट पहनकर आना अनिवार्य किया गया था। तब से लेकर अब तक यह वकीलों की पहचान बना हुआ है।

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क्या कभी सोचा है पुलिस की वर्दी का रंग खाकी क्यों होता है ? ये है वजह

जानिए शादी के बाद क्यों चलता है महिलाओं का अफेयर ? यह है वजह

मोबाइल और एंटरटेनमेंट की इस वर्तमान दुनिया में विचारों और भावनाएं एक तरह से खुली किताब की तरह हो गयी है। इंटरनेट के इस जमाने में कोई भी चीज़ पर्सनल नहीं रह गयी है। इन सब चीज़ों का अगर लाभ है तो इसके नुकसान भी है। हर एक चीज़ के दो पहलू होते हैं, अच्छा और बुरा। तकनीक इंसान को स्मार्ट तो बना रही है लेकिन भावना शून्य भी बना रही है।

तकनीक का अगर किसी चीज़ पर सबसे बुरा असर पड़ा है तो वह है रिश्ता। एक रिश्ता है शादी के बाद अवैध संबंध यानि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर। अक्सर देखा गया है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में महिलाओं को दोषी ठहराया जाता है। यह दुनिया हमेशा दूसरों पर उंगली उठाती है ठीक इसी तरह से जब किसी औरत के चरित्र को गलत ठहराया जाता है तो उसकी मजबूरी और कारण पर ध्यान नहीं दिया जाता है।

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पुरुष प्रधान समाज में पुरुष का चरित्र जितना उज्जवल होना चाहिए उतना ही महिला का भी होना चाहिए। किसी भी रिश्ते का लंबे समय तक चलना उस रिश्ते में रहने वाले दोनों लोगों के विश्वास और सच्चाई पर निर्भर करता है। प्यार के रिश्ते में बेवफाई सबसे बड़ा जुर्म होता है।

अगर कोई महिला अपने रिश्ते में बेवफाई करती है तो इसका ये मतलब नहीं होता है कि वह अपनी सिर्फ हवस के लिए ही मर्यादा को लांघती है। जब रिश्ते में भावनाएं मेल नहीं खाती हैं तो रिश्ते में दरार आने लग जाती है। कुछ तो ऐसे रिश्ते को ज़िन्दगी भर ढोते रहते हैं और कुछ मर्यादा की चारदीवारी को लांघ कर अपनी मन की सुनते हैं।

आज हम जानेंगे कि ऐसा क्या कारण हैं कि एक महिला शादी के बाद किसी से प्रेम संबंध बनाती है।

1- अतीत से उभर न पाना

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आजकल हम सभी जानते हैं कि शादी से पहले हर किसी का अपना क्रश और प्रेमी होता है। जब उनकी शादी की जाती है तो यह शादी समाज और परिवार के दबाव में की जाती है। लोग शादी तो कर लेते हैं लेकिन उनका पहला प्यार उनके मन में सदा के लिए बना रहता है। जब वही प्यार शादी के बाद नहीं मिल पता तो बीता हुआ समय उन्हें याद आने लगता है।

अगर एक महिला की बात की जाए तो जब उसके इमोशन को, उसकी फीलिंग को पति ठीक से नहीं समझता है और उसकी इज्जत नहीं करता है तो वह किसी ऐसे व्यक्ति को ढूढ़ती है जो इस सब कमी को पूरा कर सके। महिला अपने पहले प्यार की तरह ही फीलिंग चाहती है। जब महिला इस चीज़ के लिए लालायित रहती है तो उसे कोई न कोई ऐसा पुरुष मिल जाता है जो उसे उसकी शादी में बेवफाई करने को मजबूर कर देता है और महिला एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर करने को मजबूर हो जाती है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने का एक कारण अतीत से न उबर पाना भी है।

2- शादी से ऊब जाना

Girl Upset Boyfriend

कहते हैं कि इंसान किसी भी चीज़ से बहुत जल्दी बोर हो जाता है। अगर यह बात शादी के रिश्ते में आजकल लागू हो तो कोई अचरज की बात नहीं होगी। ऐसा देखा गया है कि एक महिला जब शादी से ऊब जाती है तो वह अपनी ज़िन्दगी में रोमांच और ताजगी लाने के लिए शादी के रिश्ते से बाहर देखती है।

एक ही ढर्रे और एक ही जगह पर चल रही शादीशुदा ज़िन्दगी में अक्सर उबाऊपन आता है। छोटे शहरों में यह चीज़ें कम देखने को मिलती हैं। लेकिन जहाँ लोग ज्यादा पढ़े-लिखे होते हैं, ज्यादा दुनिया देखी होती है वहाँ लोग शादी में एक समय बोरियत महसूस करने लगते हैं।

3- फीलिंग का मेल न खाना

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एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने का सबसे बड़ा कारण फीलिंग को न समझ पाना है। जब पति पत्नी की फीलिंग को नहीं समझेगा तब वह उसकी इज्जत नहीं करेगा। आज के जमाने की महिला एक वक़्त का खाना खा लेगी लेकिन अगर उसे पति से इज्जत नहीं मिले तो वह बागी हो जाती है। जिसका परिणाम होता है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति के प्यार में पड़ जाती है जो उसकी फीलिंग को समझता है। भावनाओं का आपस में न जुड़ना भी आजकल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने का एक बड़ा कारण है।

4- रिश्ते में बदला लेना

रिश्ते में बदला लेना दो तरह का होता है। महिला अपने पति से तब बदला लेती है जब उसका पति उसकी इज्जत नहीं करता है तो वह विद्रोही हो जाती है। दूसरा जब उसके पति का कहीं और अफेयर चल रहा हो तो पत्नी भी पति को सबक सिखाने के लिए रिश्ते से बेवफाई कर जाती है।

जब पति बेवफाई करता है तो पत्नी भी निर्भीक हो जाती है। वह भी फिर अपनी दबी भावनाओं को इजहार करती है और या तो अपने पुराने प्रेमी या किसी और के साथ शादी के बाद संबंध बना लेती है।

5- सेक्स भी है सबसे बड़ा कारण

Signs Your Spouse Could Be Cheating

जब शादी में सेक्स कम होता है या महिला अपने पति से सेक्सुअली असंतुष्ट होती है तो वह पति से बेवफाई करती है। सेक्स एक शारीरिक जरूरत होती है जब महिला अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती तो वह किसी ऐसे पुरुष को खोजती है जो उसकी जरूरत को पूरा कर सके। जब शादीशुदा ज़िन्दगी में कम सेक्स होता है तो रिश्ता बिखरता है।

6- महिला का स्वाभिमान कम होना

कभी-कभी ऐसा होता है कि महिला को लगता है कि उसका स्वाभिमान काफी कम है और ज्यादा इज्जत और अपने स्वाभिमान के लिए वह दूसरों से प्रेम संबंध बना लेती है। जब पति पत्नी को उसका अधिकार, हक़ और रुतबा उसे नहीं देता है तो महिला बागी और बेखौफ हो जाती है। एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने का यह भी एक बड़ा कारण है। इसके अलावा भी आपको कोई कौन से कारण लगते हैं तो आप हमें कमेंट करके जरुर बताएं

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